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मकर-संक्रांति पूजा विधि !! Makar Sankranti Puja Vidhi

मकर-संक्रांति पूजा विधि [ Makar Sankranti Puja Vidhi ] : 

पोष या माघ मास की १४ जनवरी को मकर संक्रांति ( #Makar_Sankranti ) मनाई जाती है ! इस दिन सूर्य ग्रह मकर राशि में प्रवेश करता है ! इससे उत्तरायण भी कहा जाता है ! कहते है की इस दिन तीर्थों में जैसे की गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम में स्नान करने से और दान देने से पुण्य की प्राप्ति होती है ! मकर संक्रांति के दिन तेल तथा तिल मिश्रित जल से स्नान करना चाहिए। इसके बाद सूर्य देव की स्तुति करनी चाहिए ! इस दिन काले तिल, दाल चावल व् खिचड़ी का दान किया जाता है ! कहते है की दान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है ! इस दिन अपने पूर्वजों का तर्पण करना चाहिए ! दक्षिण भारत में इस उत्सव को पोंगल कहा जाता है ! 

मकर संक्रांति पूजन सामग्री [ Makar Sankranti Pujan Samagri ] : 

सफ़ेद या काले तिल के बने लड्डू, जल से भरा लोटा, चावल, रोली, सामर्थ अनुसार दक्षिणा , 14 सुहागिन महिलाओं को देने के लिए कोई भी 14 वस्तु, मिठाई में घेवर ! 

मकर संक्रांति पूजन विधि [ Makar Sankranti Pujan Vidhi ] :

पहले आप बायना निकालने के लिए एक थाली में २ घेवर, तिल के लड्डू व् अपने सामर्थ के अनुसार दक्षिणा रख लें ! बायने की थाली में पहले रोली व् चावल के छीटें दें ! उसके बाद स्वयं के  तिलक निकाले ! उसके बाद यह बायना अपनी सास को दें दे ! यदि आपकी सास नही है तो ननद, जेठानी या किसी भी ब्राहमण स्त्री को दे सकते है ! उसके बाद इसी तरह 14 वस्तुओं के भी रोली का टीका लगा दें, जल व् चावल के छीटें मारकर हाथ जोड़ लें !और उसके बाद इसे 14 सुहागिनों में बाँट दें ! 

मकर संक्रांति व्रत विधि [ Makar Sankranti Vrat Vidhi ] : 

यदि आप मकर संक्रांति का उपवास करते है तो इस दिन आपको तेव व् तिल मिले हुए जल से स्नान करना चाहिए व् दिन में केवल एक बार ही भोजन करना चाहिए ! व् सूर्य देव की स्तुति करनी चाहिए ! यदि हो सके तो मकर संक्रांति के दिन किसी तीर्थ पर जाकर स्नान करना चाहिए व् दान पुण्य करना चाहिए !  आप इस दिन अपने पितृ का तर्पण भी कर सकते है ! 

मकर संक्रांति पूजा मंत्र [ Makar Sankranti Puja Mantra ] : 

दिए गये मन्त्र से मकर संक्रांति के दिन श्री सूर्य देव की पूजा अर्चना करनी चाहिए ! 

ऊं सूर्याय नम: ,

ऊं आदित्याय नम:,

ऊं सप्तार्चिषे नम:,

ऊं ऋड्मण्डलाय नम: ,

ऊं सवित्रे नम: ,

ऊं वरुणाय नम: ,

ऊं सप्तसप्त्ये नम: ,

ऊं मार्तण्डाय नम: ,

ऊं विष्णवे नम:

नोट : यदि आपके जीवन में कोई परेशानी चल रही है तो दिए गये नंबर पर कॉल करके आचार्य से अपनी कुंडली दिखा कर उचित सलाह ले सकते है ! +91-7821878500 ( Not For Free Services )

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Updated: January 13, 2017 — 22:30

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